साल 2026 भारतीय रेलवे के लिए महीन बदलाव और तकनीकी उन्नयन लेकर आया है। केवल नई ट्रेनों या टाइम-टेबल तक सीमित नहीं — रेलवे AI-आधारित टेक्नोलॉजी को बड़े स्तर पर अपनाकर रेल प्रणाली को तेज़, सुरक्षित और स्मार्ट बनाने के लिए अग्रसर है।
1. AI — रेलवे की नई ‘तकनीकी रीढ़’
AI का इस्तेमाल रख-रखाव (Maintenance) में रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि 2026 में Indian Railways AI (Artificial Intelligence) का इस्तेमाल मुख्य रूप से मेंटेनेंस गतिविधियों (track, signalling, infrastructure आदि) के लिए व्यापक स्तर पर करेगा।
इसके तहत
AI-सहायित सिस्टम से ट्रैक और इंफ्रास्ट्रक्चर की निगरानी होगी।
भविष्य में होने वाली खराबी को predictive (पूर्वानुमान) तरीके से पहचाना जाएगा।
यह सिस्टम रख-रखाव को तेज़, सुरक्षित और लागत-कुशल बनाएगा
क्या होगा बदलाव?
अब रेलवे कार्यों में इंसानों के साथ AI-सिस्टम की सहायता होगी, जिससे रख-रखाव ज्यादा सटीक और जल्दी होगा।
तकनीक-आधारित मॉनिटरिंग से अचानक तकनीकी खराबी/दिक्कत का पता पहले ही चल सकेगा।
2. 52 सुधारों का ‘52 हफ्तों में सुधार’ मिशन
रेलवे ने “52 Reforms in 52 Weeks” नाम से एक बड़ा मिशन शुरू किया है, जिसमें तकनीक, सुरक्षा और सेवा सुधार को केंद्र में रखा गया है।
AI और Advanced Tech को अपनाना।
सुरक्षात्मक टेक्नोलॉजी व सिस्टम को बढ़ावा।
ट्रेन सेवाओं, ट्रेन ऑपरेशन और यात्रियों के लिए सुविधाओं को स्मार्ट तरीके से विकसित करना।
ट्रेन कर्मचारियों को नए तकनीक-गत प्रशिक्षण देना।
इसका उद्देश्य
रेल सुरक्षा को और कड़ा करना।
सेवाएँ तेज़ और भरोसेमंद बनाना।
रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को डिजिटल और AI-प्रेरित दिशा देना।
3. AI-आधारित इंट्रूज़न डिटेक्शन (Safety AI)
रेलवे सिग्नलिंग और सुरक्षा में भी AI का इस्तेमाल कर रहा है।
खासकर elephant zones पर AI-ड्रिवेन इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम लगाया गया है।
यह सिस्टम ट्रैक के किनारे से हाथियों या जानवरों के आने पर वास्तविक-समय चेतावनी (alerts) भेजता है।
इससे डीरेलमेंट और हादसों की संभावना कम होती है।
कैसे काम करता है?
AI सेंसर्स और acoustic systems ट्रैक पर आसपास की गतिविधियों का विश्लेषण करते हैं।
कंट्रोल रूम और ट्रेन चालक को तुरंत सूचना भेजते हैं ताकि संभावित खतरे को रोका जा सके।
4. Predictive Maintenance भविष्य-दृष्टि वाला रख-रखाव
AI आधारित predictive maintenance डेवलपिंग सिस्टम का असर साफ दिख रहा है
सिग्नलिंग सिस्टम में AI बिल्ट-इन मॉड्यूल से नियमित असफलताओं का पूर्वानुमान मिलता है।
OMRS (ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम) और WILD जैसे मशीन-सेंसरों के साथ AI संकेतों को जोड़कर डीटा-ड्रिवेन रख-रखाव संभव हुआ है। प्रभाव
खराब सिस्टम का समय से पहले पता चलेगा।
अनिश्चित तकनीकी रुकावटों का समाधान जल्दी मिलेगा।
रेल परिचालन और यात्रियों की सुरक्षा बेहतर होगी।
AI आधारित डिजिटल टिकटिंग सेवाएँ
जहाँ तक 2026 में AI आधारित यात्रियों के लिए सेवाओं का सवाल है, कुछ स्टेशन पर AI-आधारित Tatkal Ticketing System जैसे नए प्रयोग भी दिख रहे हैं।
उदाहरण- बेगूसराय स्टेशन पर AI-प्रेरित तत्काल टिकट बुकिंग सेवा शुरू की जा रही है, जो रात 12 बजे से यात्रियों को तत्काल टिकट प्रदान करेगी।
इसका मतलब यह है कि – यात्रियों को टिकटिंग में तेज़, स्मार्ट और आसानी-पूर्ण अनुभव मिलेगा।
रेलवे की आय और ग्राहक संतुष्टि दोनों में सुधार होगा।
AI का व्यापक प्रभाव
सुरक्षा में सुधार– AI आधारित निगरानी से दुर्घटना-जोखिम कम होगा। रख-रखाव तेज़, स्मार्ट और कम खर्चीला। पारंपरिक “reactive” रख-रखाव के बजाय “predictive” AI-आधारित रख-रखाव होगा।
नई तकनीक-आधारित सेवाएँ- स्टेशन और ट्रैनों पर डायरेक्ट AI-सिस्टम से यात्रियों के अनुभव को बेहतर किया जाएगा।
निष्कर्ष 2026 में Indian Railways + AI
साल 2026 भारतीय रेलवे के लिए तकनीकी बदलाव की दिशा में बड़ा मोड़ रहा है। AI के उपयोग से रेल सेवा केवल तेज़, सुरक्षित और स्मार्ट नहीं हुई, बल्कि इसका असर सिस्टम स्तर पर संरचना, रख-रखाव, निगरानी और यात्रियों की सुविधा पर भी देखा जा रहा है।
यह कदम Indian Railways को वैश्विक स्तर पर आधुनिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क की दिशा में आगे ले जा रहा है।